सीरिया में आईएस लेता है टैक्स

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आईएस ने कथिततौर पर 20 करोड़ डॉलर जमा कर लिए हैं। यह रकम उसने अनिवार्य रूप से दिए जाने वाले धर्मार्थ कर जिसे जकात भी कहते हैं, उसके जरिये जमा की है। शरिया कानून की गलत व्याख्या कर आईएस ने जबरदस्त पूंजी जमा की है। यदि कोई व्यक्ति जकात देने से इंकार करता है, तो उसे बर्बर सजा दी जाती है। कई मामलों में तो ऐसे व्यक्तियों की सार्वजनिक रूप से बर्बरतापूर्वक हत्या की जाती है। गैर-इस्लामिक किसी की काम को करने वाले व्यक्ति पर यह संगठन भारी जुर्माना लगाता है। सार्वजनिक रूप से हत्याएं करने के लिए कुख्यतात आईएस ने एक पुलिस स्टेट बना दी है। यहां धार्मिक पुलिस अल-हेस्बाह लोगों की कड़ी निगरानी करती है। चोरी करते हुए पाए जाने पर यह लोगों के हाथ काट देता है।

सशस्त्र बदमाशों को तो और भी कड़ी सजा दी जाती है। उनका दायां पैर और बायां हाथ काट दिया जाता है। डकैतों को मौत की सजा देते हुए सार्वजनिक रूप से उनका सिर कलम कर दिया जाता है। टैक्स सिस्टम का कड़ाई से पालन किया जाता है। ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफा को एक सीरियाई बिजनेसमैन अम्मार (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उसके पार्टनर को आईएस के टैक्स कलेक्टरों ने गिरफ्तार कर लिया था और एक लाख डॉलर यानी करीब 62 लाख रुपए लेकर ही उसे छोड़ा। अम्मार ने बताया कि उससे कहा गया कि उसके पास बहुत पैसा है, तो उसे अपना हिस्सा आईएस को देना होगा। वे आपकी आय की गणना करते हैं और फिर अपना हिस्सा ले लेते हैं। इस पैसे को आईएस के आतंकी जकात कहते हैं।

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