आधार के डाटा फुलप्रूफ होने संबंधी दावे को लेकर केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट का सवाल

आधार को लेकर दूसरे दिन भी सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की कांस्टीट्यूशन बेंच की सुनवाई जारी रही। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार कई बार आधार का डाटा फुलप्रूफ होने से जुड़े दावे कर चुकी है, लेकिन हाल ही में क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी का डाटा लीक हो गया था।

पिटीशनर्स की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दिवान ने जस्टिस चंद्रचूड़ का एक फैसला पढ़ते हुए कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र तभी तक जीवित रहता है, जब तक नागरिकों को भरोसा रहता है कि देश में कानून का शासन होगा।दिवान ने कहा कि आधार प्रोसेस की तीन समस्याएं हैं।

पहली विश्वसनीयता, दूसरी जानकारी का भरोसेमंद होना और तीसरी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन।उन्होंने कहा कि आधार एनरोलमेंट फार्म में ऐसा कुछ नहीं, जो यह बताए कि आधार स्वैच्छिक है।मेरी निजी जानकारी किसी व्यक्ति को देने के लिए सरकार कैसे बाध्य कर सकती है?

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि लोग हमेशा निजी कंपनियों को जानकारी देते रहे हैं। आजकल तो मोबाइल भी उंगली के निशान से खुलते हैं, क्योंकि आपका डाटा कंपनियों के साफ्टवेयर में है। तो आधार से क्या दिक्कत है?इस पर दिवान ने कहा समस्या यह है कि उन्हें जानकारी देने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिन्हें आप जानते नहीं।

पिछले साल मार्च में धोनी के आधार कार्ड की डिटेल सार्वजनिक होने पर पत्नी साक्षी ने नाराजगी जाहिर की थी।आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद को निशाने पर लेते हुए साक्षी ने एक के बाद एक ट्वीट किए थे।साक्षी ने ट्वीट कर कहा कि क्या किसी तरह की निजता बची है। आधार कार्ड की जानकारी के साथ उनका एप्लीकेशन फॉर्म भी प्राइवेट प्रॉपर्टी बना दिया गया है।

इसके रिप्लाई में रविशंकर प्रसाद ने लिखा है नहीं, यह पब्लिक प्रॉपर्टी नहीं है।दरसअल, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की एक फोटो ट्वीट की थी, जिसमें धोनी आधार कार्ड के लिए फिंगर प्रिंट देते दिख रहे हैं।

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