दुष्कर्म मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शाहनवाज हुसैन

भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने 2018 के कथित दुष्कर्म मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन के वकील ने प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए मामले का उल्लेख किया।

वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का राजनीति में लगभग तीन दशक लंबा करियर रहा है और प्राथमिकी दर्ज करने से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान होगा। शीर्ष अदालत मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमत हुई।शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में, हुसैन ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय इस बात की सराहना करने में विफल रहा कि उसे मामले में अवैध रूप से फंसाया गया था।

क्योंकि महिला जिसका उनके भाई के साथ वैवाहिक विवाद चल रहा था, का एक उल्टा मकसद था।याचिका में कहा गया है याचिकाकर्ता एक ‘जेड’ प्लस सुरक्षा संरक्षित है और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार और असत्य पाए गए हैं, क्योंकि वह अपने बयानों को बदलती रही और याचिकाकर्ता और उसके स्थान का सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार कभी मिलान नहीं हुआ।

हुसैन ने दावा किया कि उसने 2017 में दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह नोएडा के रहने वाले अपने भाई शाहबाज खान से अलग रह रहा है और एक महिला अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए लगातार उसे बदनाम कर रही है।दिल्ली उच्च न्यायालय ने हुसैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के तहत विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

उच्च न्यायालय ने कहा मौजूदा मामले में, प्राथमिकी दर्ज करने में भी पुलिस पूरी तरह से हिचक रही है। प्राथमिकी के अभाव में, जैसा कि विशेष न्यायाधीश ने सही ढंग से देखा, पुलिस केवल वही कर सकती थी, जो प्रारंभिक जांच है।जून 2018 में दिल्ली की एक महिला ने हुसैन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (दुष्कर्म), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराध करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

महिला ने आरोप लगाया था कि भाजपा नेता ने उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी भी दी। उसने प्राथमिकी दर्ज करने के लिए दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया था।

Check Also

आरबीआई ने सभी क्रेडिट सूचना कंपनियों को दिया एक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश

आरबीआई ने सभी क्रेडिट सूचना कंपनियों को 1 अप्रैल, 2023 तक एक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *