मन के BOL

संत कबीर के दोहे – भाग 3 | Kabeer Ke Dohe – Part 3

जा पल दरसन साधू का , ता पल कीबलिहारी | राम नाम रसना बसे , लीजै जनम सुधारी || What a great moment it was. I met a good person. I chanted Ram and did good to my whole life. जो तोकू कांता बुवाई , ताहि बोय तू फूल | तोकू फूल के फूल है , बंकू है तिरशूल || …

Read More »

संत कबीर के दोहे – भाग 3 | Kabeer Ke Dohe – Part 3

जा पल दरसन साधू का , ता पल कीबलिहारी | राम नाम रसना बसे , लीजै जनम सुधारी || What a great moment it was. I met a good person. I chanted Ram and did good to my whole life. जो तोकू कांता बुवाई , ताहि बोय तू फूल | तोकू फूल के फूल है , बंकू है तिरशूल || …

Read More »

संत कबीर के दोहे – भाग 2 | Kabeer Ke Dohe – Part 2

अवगुण कहू शराब का , आपा अहमकहोय | मानुष से पशुआ भय , दाम गाँठ से खोये|| A person loses his balance if he takes liquor. He becomes a beast by spending his own money. उज्जवल पहरे कापड़ा , पान सुपारी खाय | एक हरी के नाम बिन , बंधा यमपुर जाय|| The robes are very impressive. The mouth is …

Read More »

संत कबीर के दोहे – भाग 2 | Kabeer Ke Dohe – Part 2

अवगुण कहू शराब का , आपा अहमकहोय | मानुष से पशुआ भय , दाम गाँठ से खोये|| A person loses his balance if he takes liquor. He becomes a beast by spending his own money. उज्जवल पहरे कापड़ा , पान सुपारी खाय | एक हरी के नाम बिन , बंधा यमपुर जाय|| The robes are very impressive. The mouth is …

Read More »

संत कबीर के दोहे – भाग 1 | Kabeer Ke Dohe – Part 1

बाहर क्या दिखलाये , अंतर जपिए राम | कहा काज संसार से , तुझे धानी से काम || There is no need of any show. You should chant Ram internally. You should not be concerned with the world but with the master of the world. जब ही नाम हिरदय धर्यो , भयो पाप कानाश | मानो चिनगी अग्नि की , …

Read More »

संत कबीर के दोहे – भाग 1 | Kabeer Ke Dohe – Part 1

बाहर क्या दिखलाये , अंतर जपिए राम | कहा काज संसार से , तुझे धानी से काम || There is no need of any show. You should chant Ram internally. You should not be concerned with the world but with the master of the world. जब ही नाम हिरदय धर्यो , भयो पाप कानाश | मानो चिनगी अग्नि की , …

Read More »

वीर – रामधारी सिंह दिनकर | Veer – by Ramdhari Singh Dinkar

सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नही विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं मुँह से न कभी उफ़ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग–निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाते हैं, बढ़ खुद …

Read More »

वीर – रामधारी सिंह दिनकर | Veer – by Ramdhari Singh Dinkar

सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नही विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं मुँह से न कभी उफ़ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग–निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाते हैं, बढ़ खुद …

Read More »

क्या सोचा…. था कि तुम ऐसा करोगी

वह दिन……… क्या सोचा…. था कि तुम ऐसा करोगी… खुदपर भरोसा…न था कि ऐसा करोगी….. सोचा मगर…बहुत दूर चला गया…कि देखा पलट के तो जमी गुजर गयी थी… सवाल आपके रोकदेते थे जवाब मेरे क्या यही पैगाम था उन सवालो का…. हमे इंतजार है उन सवालो का जो छिप-छिप कर करती थी तुम… आज कसमो की अहमियत भी ना रही… …

Read More »

नारी तू नारायणी है।

नारी सम्मान की हकदार है, सही है प्यार की दरकार है, सही है। क्या फर्क पड़ता है हम बेटी हों, बहु हों जिस घर में भी हों, सही हों। अपने सपनों को उड़ान दो, उस डाल पर बैठो जहाँ बड़ो की छांव हों। सम्मान की कमी कहीं नहीं है, यदि नारी बेटी हों या बहु हों सही है। बरगद जितना …

Read More »