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मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति गयूम और चीफ जस्टिस को अरेस्ट करने से मालदीव में गहराया संकट

मालदीव में इमरजेंसी लगाए जाने के कुछ देर बाद ही यहां के पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम और चीफ जस्टिस को अरेस्ट कर लिया गया। उनकी बेटी ने ट्विटर पर यह जानकारी दी है। बता दें कि हाल ही में देश की सुप्रीम कोर्ट ने 9 राजनेताओं की रिहाई के आदेश दिए थे। राष्ट्रपति यामीन ने यह आदेश मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यहां राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है।

बता दें कि गयूम मालदीव के 30 साल तक प्रेसिडेंट रहे हैं। वे 2008 में देश में लोकतंत्र की स्थापना होने के बाद तक राष्ट्रपति रहे। इसके बाद हुए चुनाव में मोहम्मद नशीद देश के पहले चुने हुए राष्ट्रपति बने थे।गयूम की बेटी युमना मौमून के मुताबिक, उनके पिता को उनके घर से दूर ले जाया गया है।

देश में 15 दिन की इमरजेंसी लगाई गई है। इसके बाद आर्मी जगह-जगह छापे मार रही है। नागरिकों के सभी अधिकार रद्द कर दिए गए हैं। सेना किसी भी शख्स को गिरफ्तार कर सकती है।उधर मालदीव के चीफ जस्टिस अली हामिद और ज्यूडिशियरी से जुड़े कुछ और अफसरों को गिरफ्तार किया गया है।

बिगड़ते हालात देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने मालदीव में रह रहे अपने नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। इसके अलावा लोगों को फिलहाल, मालदीव ना जाने की सलाह भी गई है।सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत 9 लोगों के खिलाफ दायर एक मामले को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इन नेताओं की रिहाई के आदेश भी दिए थे।

कोर्ट ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला की पार्टी से अलग होने के बाद बर्खास्त किए गए 12 विधायकों की बहाली का भी ऑर्डर दिया था।सरकार ने कोर्ट का यह ऑर्डर मानने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते सरकार और कोर्ट के बीच तनातनी शुरू हो गई।कई लोग राष्ट्रपति अब्दुल्ला के विरोध में सड़कों पर आए थे। विरोध देखते हुए आर्मी को अलर्ट पर रखा गया था।

मालदीव में 2008 में लोकतंत्र की स्थापना हुई थी। मोहम्मद नशीद लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मालदीव के पहले राष्ट्रपति हैं। 2015 में उन्हें आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत सत्ता से बेदखल कर दिया गया था।नशीद देश के पहले निर्वाचित नेता हैं। वे अभी ब्रिटेन में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं और अपने राजनीतिक अधिकारों को बहाल करने की कोशिशों में लगे हैं।

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