नारी। हां, मैं नारी हूं

 

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International Women’s Day : नारी। हां, मैं नारी हूं। किसी की पत्नी। किसी की बहू। किसी की बेटी, किसी की बहन, किसी की मां। किसी की ननद। किसी की भाभी। ना जाने कितने मीठे, मोहक रिश्तों को अपने आंचल में बांधे मैं ढूंढती हूं खुद को। मैं मिलती हूं खुद से। रिश्तों के इतने सुरीले-सुरम्य आंगन में खड़ी मैं बनाती हूं एक रिश्ता अपने आप से। जी हां, मेरा एक रिश्ता और है और वह है मेरा मुझसे। खुद का खुद से। स्वयं का स्वयं से। अपना सबकुछ देने के बाद भी मैं बचा कर रखती हूं खुद को खुद के लिए। मैं नहीं भूलती उस खूबसूरत रिश्ते को जो मेरा मुझसे है।

यह रिश्ता मुझसे मेरा परिचय करवाता है। यही रिश्ता मुझे कहता है मुझमें ही झांकने के लिए। कितने मधुर सपने हैं मेरे भीतर जो साकार होने के लिए कसमसा रहे हैं। यह रिश्ता मुझे चुनौती देता है, ऐसा क्या है जो तुम नहीं कर सकती? ‍फिर यही कहता है मुझसे-सब कुछ तो कर सकती हो। यह रिश्ता मुझ पर मेरा विश्वास स्थापित करता है… और मैं जीत जाती हूं दुनिया की हर जंग। मैं अपने आप से लड़ती भी हूं, मैं अपने आप से प्यार भी करती हूं। मैं अपने आप का सम्मान करती हूं-यही रिश्ता बतलाता है मुझे।

आठ मार्च को महिला दिवस के मौके पर क्या हमें लीक से हटकर कुछ नहीं करना चाहिए? आठ मार्च से पहले और बाद में हफ्ते भर तक विचार विमर्श और गोष्ठियां होंगी जिनमें महिलाओं से जुड़े मामलों जैसे महिलाओं की स्थिति, कन्या भ्रूण हत्या, लड़कियों की तुलना में लड़कों की बढ़ती संख्या, बोर्ड रूम में महिलाओं की कम मौजूदगी, संसद में अटका पड़ा महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण संबंधी विधेयक, गांवों में महिला सरपंचों का काम, महिलाओं की सुरक्षा और विशेष रूप से उनके खिलाफ होने वाले अपराध को विभिन्न सम्मेलनों, कार्यशालाओं, रैलियों, नाटकों, प्रतिज्ञाओं और ज्ञापनों के जरिए प्रचारित किया जाएगा।

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महिला दिवस, एक ऐसा दिन जिसमे दुनियाँ भर की महिलाओं को सम्मान दिया जाता हैं, उनका गुणगान किया जाता हैं. कई देशों में इस दिन अवकाश भी रखा जाता हैं . और कई तरह से इस दिन को मनाया जाता हैं लेकिन क्या महिलाओं की स्थिती दुनियाँ के किसी भी देश में इतनी सम्मानीय हैं ? क्या महिलायें अपने ही घर एवम देश में सुरक्षित हैं? अधिकारों की बात क्या करे, जब सुरक्षा ही सबसे बड़ा विचारणीय मुद्दा हैं ऐसे में अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे दिन समाज को दर्पण दिखाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। माना कि एक दिन से महिला विकास संभव नहीं, लेकिन कहीं ना कहीं, यह एक दिन भी पूरी दुनियाँ को एक साथ इस ओर सोचने का मौका देता हैं, जो हर हाल में महत्वपूर्ण हैं।  इसलिए इस एक दिन को छोटा समझ कर इसे भुलाने की गलती ना करे बल्कि एकजुट होकर इस एक दिन को साकार बनाये ताकि देश विदेश हर जगह महिलाओं की स्थिती में सुधार आये।

महिला दिवस को हर महिला अपने-अपने अंदाज़ में मनाएंगी। इसी मौके पर हमने जानी मानी हस्ती ज्योति गुप्ता (Director, VS MATRIX PVT. LTD.) से जाना की वो इस बार क्या स्पेशल करने जा रही है। “इंटरनेशनल विमन्स डे मेरे लिए बहुत खास है और हर साल की तरह इस साल भी मैं इस दिन अनाथालय में पल रहीं बच्चियों के साथ अपना वक्त गुजारूंगी और उनकी समस्याओं को समझकर उनके कल्याण के लिए कदम उठाउंगी। मैं यह मानती हूं कि किताबें इन्सान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं इसलिए हर साल की तरह मैं उन बच्चियों में प्रेरणादायक किताबें भी बाटूंगी और साथ ही कुछ ऐसा करूंगी की इनमें स्वास्थ्य के प्रति जिज्ञासा पैदा हो सके।”

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