कृप्या यहां ज्ञान न बांटे…यहां सब ज्ञानी हैं..!

अपने कार्यकाल के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भले ही जनता के लिए कुछ न कर पायी हों लेकिन चुनावी साल में शीला दीक्षित ने जनता के लिए सरकारी खजाना तो नहीं खोला लेकिन अपने “ज्ञान” का पिटारा जरूर खोल दिया है। शीला जी आजकल जहां जा रही हैं बस ज्ञान बांटती फिर रही हैं। दिल्ली में भूख से हो रही मौतों को रोकने में नाकाम रही शीला दीक्षित पहले अपना ज्ञान बघारते हुए कहती हैं कि 600 रूपए महीने में 5 लोगों के परिवार का पेट बड़ी आसानी से भर जाता है यानि कि बकौल शीला एक व्यक्ति 4 रूपए में भरपेट भोजन कर सकता है। लेकिन इसका जवाब उनके पास नहीं होता कि दिल्ली में भूख से हर हफ्ते एक व्यक्ति क्यों दम तोड़ देता है..?

अब दिल्ली वालों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने में नाकाम शीला जी दिल्ली वालों से कह रही हैं कि ज्यादा बिजली का बिल नहीं भर सकते तो खपत कम करो…शीला जी यहीं नहीं रूकती वे ये भी कहती हैं कि बिल नहीं भर सकते तो कूलर क्यों चलाते हो…कूलर की जगह पंखे चलाओ..!

बिजली दिल्ली वालों को एक के बाद एक झटके दे रहे हैं लेकिन शीला जी के पास इसका कोई ईलाज नहीं है। लेकिन चुनावी साल है ईलाज नहीं कर सकते तो क्या सलाह तो दे ही सकते हैं…शीला दीक्षित ने भी ऐसा ही किया और दिल्लीवालों को खपत कम करके बिजली का बिल कम करने की सलाह दे डाली। अब शीला दीक्षित भले ही उनके बयान का गलत मतलब निकालने के लिए मीडिया के सिर इसका ठीकरा फोड़ कर सफाई देती फिर रही हों लेकिन कहते हैं न दिल की बात तो जुबां पर आ ही जाती है…शीला जी के जुबां पर भी आ गई तो इसमें उनका क्या दोष..?

गनीमत तो ये रही कि प्याज के आसमान चढ़ते दामों पर शीला दीक्षित ने कृषि मंत्री शरद पवार को सिर्फ पत्र लिखकर कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्याज का निर्यात कम करने का अऩुरोध किया। दिल्ली वालों से ये नहीं कहा कि प्याज खरीदने की औकात नहीं है तो प्याज खाना छोड़ दो।

शीला जी आप दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं…सरकार चला रही हैं, निश्चित तौर पर आप ज्ञानी होंगी लेकिन आपके लिए एक बिन मांगी सलाह है जो आपका सामान्य ज्ञान भी बढ़ा देगी..! बात ये है कि ये जो जनता है न ये भी बड़ी ज्ञानी है…वो भी दिल्ली की जनता सोचो कितनी ज्ञानी होगी…आपसे अनुरोध है कि आप सरकार की मुखिया होते हुए भूख से हो रही मौत नहीं रोक सकती..! दिल्ली वालों को सस्ती बिजली नहीं उपलब्ध करा सकती तो कृप्या करके अपना ज्ञान भी अपने पास ही रखें। कहीं ऐसा न हो कि चुनावी साल में जनता का अपने सामान्य ज्ञान से आपकी सरकार का गणित और भूगोल सब बिगाड़ दे।

लाखन सैनी 

पत्रकार

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