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भारत निर्माण या..?

आम चुनाव से पहले एक बार फिर से जनता को भ्रष्टाचार और घोटालों के अंधकार में भविष्य के सुनहरे सपने दिखाने का काम शुरु हो गया है। सही मायने में कहा जाए तो एक और “इंडिया शाइनिंग” की शुरुआत हो चुकी है और इस पर 180 करोड़ की भारी भरकम राशि खर्च की जाएगी..! फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार नाम “इंडिया शाइनिंग” की जगह “भारत निर्माण” रखा गया है। फिल्म के निर्माता और निर्देशक भी बदल गए हैं…पहले ये ख्वाब 2004 के आम चुनाव से पहले एनडीए सरकार ने दिखाया था तो अब यूपीए सरकार दिखा रही है। नाम बदल गया, निर्माता- निर्देशक बदल गए लेकिन किरदार नहीं बदले..! किरदार के रुप में देश की जनता पहले भी थी और अब भी है..!

कुल मिलाकर जनता के पैसे से जनता को ही एक ऐसी फिल्म दिखाई जाएगी जिसमें देश की जनता को उसके बदहाल हाल से उल्ट खुशहाल दिखाया जाएगा..!

असल जीवन से उल्ट फिल्मों के किरदार के रुप में खुद को देखकर भले ही देश की जनता को पलभर के लिए खुशी और सुकून की अनुभूति हो लेकिन  ये खुशी रेगिस्तान में नज़र आने वाली उस मरीचिका की तरह है जो दूर से तो रेगिस्तान में पानी होने का एहसास कराती है लेकिन करीब पहुंचने पर महज एक छलावा साबित होती है..!

जनता के भाग्य विधाता सरकार चलाने वाले कहते हैं कि उनके कार्यकाल में देश ने तरक्की की है..! नए आयामों को छुआ है और जनता की समस्याओं को दूर करने का हर संभव प्रयास किया है लेकिन ये समझ नहीं आता कि अगर वाकई में ये भाग्य विधाता सही फरमा रहे हैं और इन्होंने ईमानदारी से काम किया है तो इस चीज का ढ़िंढ़ोरा पीट पीट कर समाचार चैनलों और अख़बारों में विज्ञापनों के रुप में जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए फूंक कर दिखावा करने की क्या जरुरत है..?

अगर सरकार ने काम किया है तो वह दिखना चाहिए न…लोग खुद इस बात को कहें कि हां काम हुआ है..उनकी समस्याओं को निराकरण हुआ है..! लेकिन हो तो इसका उल्ट रहा है काम की चर्चा तो कम रहती है लेकिन भ्रष्टाचार और घोटालों की चर्चाएं ज्यादा रहती हैं। शायद यही सत्ताधारी दलों की परेशानी की वजह भी है कि कहीं भ्रष्टाचार और घोटालों की चर्चा की गूंज उनकी कुर्सी न हिला दे..!

शायद यही वजह भी है कि अपनी उपलब्धियों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाने के लिए “इंडिया शाइनिंग” और “भारत निर्माण” सरीखे अभियान शुरु किए जाते हैं और इन पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा दिया जाता है। इंडिया शाइनिंग पर तत्कालीन एनडीए सरकार ने करीब 150 करोड़ रुपए उड़ाए थे तो भारत निर्माण पर अब यूपीए सरकार करीब 180 करोड़ रुपए बहाने की तैयारी में है।

यूपीए सरकार ने इससे पहले साल 2009 में भी जनता को लुभाने के लिए ऐसी ही मरीचिका तैयार करने में करीब 35 करोड़ रुपए उड़ाए थे..!

यूपीए सरकार के अभी तक के 9 साल के कार्यकाल में अब भारत निर्माण नहीं हुआ तो क्या हुआ..? सरकार के कुछ खास लोगों का निर्माण तो हुआ जिसमें ए राजा, सुरेश कलमाड़ी, पवन बंसल, अश्विनी कुमार, सलमान खुर्शीद और खुद मनमोहन सिंह समेत और न जान कितने नेता-मंत्री शामिल हैं..!

अब अपने इन नेताओं-मंत्रियों के व्यक्तिगत निर्माण को ही यूपीए सरकार भारत निर्माण का नाम दे रही है…अरे भई…दे भी क्यों न..? आखिर ये  सब भी तो भारत के ही वासी हैं और इनका निर्माण हुआ न…भारत निर्माण..!

इसी भारत निर्माण को अख़बारों में सरकार की तारीफों से भरे विज्ञापनों और बुद्धु बक्से के सहारे देश की जनता को बुद्धु बनाने का काम भी फिर से शुरु हो गया है लेकिन देखना ये होगा कि क्या बुद्धु बक्से के जरिए जनता को बुद्धु बनाने की यूपीए की कोशिश रंग लाएगी या फिर 2004 के एनडीए सरकार के इंडिया शाइनिंग नारे की तरह यूपीए सरकार के भारत निर्माण अभियान की भी हवा निकल जाएगी..!

लाखन सैनी

इंडिया हल्ला बोल

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