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सीलिंग के विरोध में आज व्यापारियों का दिल्‍ली बंद

व्यापारिक संगठनों ने दिल्ली में चल रही सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में आज सभी बाजार बंद रखने का फैसला किया है. सीलिंग के विरोध में दिल्ली के कई छोटे-बड़े बाजारों में व्यापारी धरना देंगे. सबसे बड़ा धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम आर्य समाज रोड पर होगा.सीटीआई के संयोजक बृजेश गोयल के अनुसार, दिल्ली में सीलिंग की 100 से अधिक शवयात्रा निकाली जाएंगी.

इस मामले में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि दिल्ली में बहुत ज्यादा संख्या में लोग आते हैं और इसलिए मास्टर प्लान में संशोधन करना जरूरी है.अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने कहा कि यह सीलिंग एकतरफा, अन्यायपूर्ण और अवैध है.

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आड़ में दिल्ली नगर निगम अधिनियम-1957 के मूलभूत प्रावधानों को ताक पर रख कर इसे अंजाम दिया जा रहा है, जिसे जायज नहीं ठहराया जा सकता.इसलिए विरोध स्वरुप दिल्ली के व्यापारी 13 मार्च को बाजार बंद रखेंगे और सिविक सेंटर का घेराव भी करेंगे. कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बाजार बंद के लिए एक बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया.

इसके अलावा बैठक में एक और प्रस्ताव पास हुआ कि केंद्र सरकार को संसद के मौजूदा सत्र में ही इस सीलिंग को रोकने के लिए एक विधेयक लाकर पारित कराना चाहिए.मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सीलिंग पर रोक लगाने का विधेयक पारित कर केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजना चाहिए.

सीलिंग के विरोध में दिल्ली के जिन बाजारों को व्यापारी बंद रखेंगे उनमें से प्रमुख बाजार हैं- चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, खारी बावली, कनॉट प्लेस, गांधी नगर, लक्ष्मी नगर, अशोक विहार, राजौरी गार्डन, लाजपत नगर, ग्रेटर कैलाश, साउथ एक्स, सरोजिनी नगर, कमला नगर, नया बाजार, भागीरथ प्लेस, लाजपतराय मार्केट, कश्मीरी गेट, प्रीत विहार, शाहदरा, कृष्णा नगर, जनकपुरी, तिलक नगर. 

लोगों को सीलिंग से राहत दिलाने के लिए डीडीए ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश कर दिया. इस बात की जानकारी केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी और उन्होंने कहा कि सीलिंग रोकने के लिए ध्यादेश की मांग और अनशन की धमकी एक राजनीति ड्रामा है.

उन्होंने कहा कि जिनको समाधान तलाशना चाहिए वह राजनीति फायदे के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि DDA एक संवैधानिक संस्था है और उसे मास्टर प्लान में संशोधन करने का अधिकार है. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में बहुत ज्यादा संख्या में लोग आते हैं और इससे मूलभूत सुविधाओं पर असर पड़ता है.

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