सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा संभालेंगे स्वतंत्र राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़

मंत्री स्मृति ईरानी से सूचना एवं प्रसारण का जिम्मा वापस ले लिया गया है, उनकी जगह अब राज्यवर्धन राठौड़ ये विभाग संभालेंगे। मंत्रालय में राठौड़ को स्वतंत्र राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। ऐसा दूसरी बार है, जब स्मृति से हाई प्रोफाइल मंत्रालय छीना गया हो। उधर, पीयूष गोयल को अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के कारण रेलवे के साथ वित्त मंत्रालय का जिम्मा भी सौंपा गया है।

बता दें कि जेटली का सोमवार को ही किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है।ये दूसरी बार है जब स्मृति ईरानी से कोई बड़ा मंत्रालय छीना गया हो। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें मानव संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, 2016 में दलित छात्र रोहित वेमुला आत्महत्या और जेएनयू जैसे विवाद उठने के बाद उन्हें कपड़ा मंत्रालय सौंपा गया था।

अगस्त 2017 में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय छोड़ने के बाद स्मृति को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी।हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए विवादित गाइडलाइन्स जारी की थीं। इसमें फेक न्यूज फैलाने वाले पत्रकारों की अधिमान्यता स्थाई रूप से रद्द करने का प्रावधान रखा गया था। 

पत्रकारों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म करने की कोशिश बताया था, जिसके बाद पीएमओ ने इन गाइडलाइन्स को वापस लेने का आदेश दिया था।इसके अलावा पिछले महीने ही राष्ट्रीय पुरस्कारों के वितरण को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था। तब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि राष्ट्रपति सिर्फ 11 विजेताओं को ही सम्मानित करेंगे। इसको लेकर कई हस्तियों ने समारोह का बहिष्कार किया था।

सूत्रों की मानें तो स्मृति ईरानी से सूचना-प्रसारण मंत्रालय का प्रभार लिए जाने की चर्चाएं चल रही थीं। इसी कारण उन्होंने कान फिल्म समारोह में जाने का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया था। जबकि, इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनके साथ आठ लोगों का भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी फ्रांस फिल्म महोत्सव में शामिल होने जाएगा।

टेलिकॉम एवं पेयजल मंत्रालय में राज्यमंत्री के पद पर रहे एसएस अहलूवालिया को सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद सौंपा गया है। वे अल्फोंस कननथनम की जगह लेंगे।बता दें कि इससे पहले मोदी कैबिनेट में पिछले साल सितंबर में बदलाव किए गए थे। तब निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री और पीयूष गोयल को रेलमंत्री बनाया गया था।

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