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दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजिन्दर सिंह सच्चर का एक निजी अस्पताल में हुआ निधन

दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजिन्दर सिंह सच्चर का निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह 94 वर्ष के थे. यह जानकारी न्यायमूर्ति सच्चर के परिवार के एक मित्र ने दी. न्यायमूर्ति सच्चर पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष थे.

न्यायमूर्ति सच्चर को इस सप्ताह की शुरुआत में राजधानी के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिवार के एक मित्र ने बताया कि न्यायमूर्ति सच्चर का निधन दोपहर करीब 12 बजे हुआ. उनका बढ़ती उम्र संबंधी परेशानियों का इलाज चल रहा था. न्‍यायमूर्ति सच्चर छह अगस्त, 1985 से 22 दिसंबर, 1985 तक दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।

जस्टिस सच्चर की पहचान एक न्यायाधीश के साथ ही शीर्ष मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर होती है, जिन्होंने अल्पसंख्यकों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर बहुचर्चित रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सच्चर कमेटी रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। अपनी रिपोर्ट में जस्टिस सच्चर ने भारत में मुस्लिम समुदाय के सामने आ रही परेशानियों का जिक्र किया था।

साथ ही इस रिपोर्ट में उन्होंने देश में मुसलमानों की स्थिति सुधारने के उपाय भी सुझाए थे। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में भारत में मुस्लिमों की स्थिति अनुसूचित जाति और जनजाति से भी बदतर बताई गई थी। जस्टिस सच्चर ने 1950 में शिमला में एक वकील के तौर पर कॅरियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सिविल, आपराधिक और राजस्व संबंधी मामलों की प्रैक्टिस की।

1972 में सच्चर को दिल्ली हाईकोर्ट में 2 साल के लिए एडिशनल जज नियुक्त किया गया। जस्टिस सच्चर संसद में महिला आरक्षण के समर्थक थे। उनका कहना था कि महिलाओं को संसद में आरक्षण देने से कानूनी मामलों में लैंगिक भेदभाव खत्म हो सकता है।

साल 2003 में जज राजेन्द्र सच्चर और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने इराक में अमेरिका द्वारा किए गए हमले की आलोचना की थी। मानवाधिकार के क्षेत्र में किए गए काम के लिए जस्टिस सच्चर हमेशा याद किए जाएंगे। देश में मुसलमानों की स्थिति पर उन्होंने 403 पेज की बहुचर्चित सच्चर कमेटी रिपोर्ट पेश की थी।

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