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सोनीपत ब्लास्ट केस में लश्कर के बम एक्सपर्ट अब्दुल करीम टुंडा को मिली उम्रकैद की सजा

सोनीपत में हुए 21 साल पुराने ब्लास्ट केस में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को उमक्रैद की सजा सुनाई गई। टुंडा कई बार पाकिस्तान जा चुका है और उसे लश्कर-ए-तैयबा का बम एक्सपर्ट माना जाता है। मंगलवार को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज ने टुंडा पर 1 लाख का जुर्माना भी लगाया। हालांकि, पहले सुनवाई में टुंडा ने बयान दिया था कि घटना के वक्त वह पाकिस्तान में था।

बता दें कि 28 दिसंबर, 1996 की शाम सोनीपत बस स्टैंड के पास एक सिनेमा हॉल और मार्केट में दो ब्लास्ट हुए थे। इसमें 12 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने सज्जन सिंह नाम के शख्स के बयान पर केस दर्ज किया।इन ब्लास्ट की जांच में आतंकी टुंडा का नाम सामने आया, लेकिन वह पाकिस्तान भाग गया।

लंबे वक्त तक कराची में रहने के बाद टुंडा 2013 में नेपाल के रास्ते भारत लौट रहा था तो दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने उसे पकड़ लिया।ब्लास्ट केस में कुल 55 गवाह थे। 46 ने गवाही दी, लेकिन जो जख्मी हुए थे, उनमें से अमित और नीलम की गवाही अहम रही। अमित ने कहा था कि जिस समय बम ब्लास्ट हुआ उसने टुंडा को वहां देखा था। नीलम ने कहा था कि सोनीपत में ब्लास्ट टुंडा ने करवाए थे।

वेस्ट यूपी के पिलखुवा का रहने वाला अब्दुल करीब टुंडा 1980 में होम्योपैथिक दवाइयों की दुकान चलाता था। इसके बाद वह आतंकी संगठनों से जुड़ा गया। दुकान बंद कर अपने साथ आतंक फैलाने के लिए उसने लोगों को शामिल किया। कहा जाता है कि बम बनाते वक्त हुए धमाके में उसका एक हाथ उड़ गया। बाद में उसे टुंडा के नाम से जाना जाने लगा।

टुंडा को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और आतंकी सरगना हाफिज सईद का करीबी समझा जाता है। उस पर मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद समेत देश के कई शहरों में कुल 43 धमाके करने का आरोप है। 1996 से 1998 के बीच दिल्ली, पानीपत, सोनीपत, लुधियाना, कानपुर और वाराणसी में हुए बम धमाकों का मास्टरमाइंड टुंडा ही माना जाता है। वह कुछ सालों तक बांग्लादेश और नेपाल में भी रह चुका है।

2000 से 2005 तक माना जा रहा था कि टुंडा मर चुका है, लेकिन 2005 में उसके साथी अब्दुल रजाक मसूद की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि आतंकी टुंडा जिंदा है।एक बार टुंडा के केन्या में गिरफ्तार होने की खबर आई थी, लेकिन बाद में केन्या पुलिस ने बताया कि पकड़ा गया शख्स टुंडा नहीं है।

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