सच्ची घटना – प्रचंड आपदाओं, दुर्घटनाओं को कोई रोक सकता है तो वो है “तंत्र”

सच्ची घटना – प्रचंड आपदाओं, दुर्घटनाओं को कोई रोक सकता है तो वो है “तंत्र” 

जैसा की हमने आपको अपने पिछले लेख में बताया था की इंडिया हल्लाबोल के पाठकों की डिमांड पर हमने दुनिया की तन्त्र की राजधानी माने जाने वाली पीठ “कामख्या मंदिर” (गुवाहटी, असम) के भैरव पीठ के उत्तराधिकारी श्री शरभेश्वरा नंद “भैरव” जी महाराज से बात कर उनसे तन्त्र के सही स्वरूप को जानने के लिए निवेदन किया था। जिस पर इंडिया हल्ला बोल के पाठकों के लिए उन्होंने पहली बार मीडिया में अपने लेख देने के लिए अपनी सहमति दी है। उसी क्रम में हम आज उनका ये लेख आपके लिए लेकर आये हैं “प्रचंड आपदाओं, दुर्घटनाओं को कोई रोक सकता है तो वो है “तंत्र”

श्री शरभेश्वरा नंद “भैरव” जी महाराज से मिलने के लिए आप 0120-4154777 पर कॉल करके अपनी मीटिंग फिक्स कर सकते हैं। 

श्री शरभेश्वरा नंद “भैरव” जी महाराज के अनुसार

आप में से बहुत से लोगों ने ऐसे महापुरुषों सिद्धों के बारे में सुना होगा कि जिन्होंने किसी बड़ी आपदा को होने से पूर्व उसका आभास कर लिया और यहां तक कि अपने तप से या अपनी विद्या के बल से उस आपदा को रोक लिया। हमारा इतिहास, हमारे ग्रंथ, शास्त्र और पुराण इस तरह की कथाओं से भरे पड़े हैं। बहुत से ऐसे संत महात्मा, योगी महापुरुष हुए हैं जिन्होंने जन कल्याण के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। किसी आने वाली बहुत बड़ी आपदा से मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया या अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की।

धन्य है हमारी संत परंपरा।

आज हम आपको एक इसी तरह की सच्ची घटना बताने जा रहे हैं। यह कहानी बताने का उद्देश्य यह है कि आम लोग इस बात को समझ सके कि अगर किसी के पास कोई शक्ति कोई विद्या (तंत्र विद्या) है तो उसके साथ बहुत सी जिम्मेदारियां भी स्वत: आ जाती है और साधक की साधना तभी चरितार्थ होती है जब वह अपने तप बल, सिद्धि का प्रयोग जनकल्याण, मानव रक्षा के लिए करता है, तो यह सिद्धियां सदैव ही कल्याणकारी होती है।

यह कहानी है हमारे पूज्य गुरुदेव जगत गुरु श्री पंचानंद गिरी जी महाराज की जो कि जूना अखाड़ा से जगतगुरु के पद पर आसीन है। बात पिछले वर्ष की है जब उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ चल रहा था।  पूज्य गुरुदेव भी उस कुंभ में शाही स्नान के लिए अपना विशाल शिविर लगाकर उज्जैन महाकाल की नगरी में प्रवास कर रहे थे। उन दिनों हम कामाख्या में थे और हमें शाही स्नान के लिए उज्जैन जाना था परंतु हमें समाचार मिला कि उज्जैन कुंभ में बहुत बड़ा तूफान आया है। बहुत से शिविरों की छतें उड़ गई है और काफी नुकसान हुआ है। साधु संतों के शिविरों में पानी भर आया और बहुत से साधु संत घायल भी हुए हैं।

हमने तुरंत गुरुदेव को संपर्क किया और उनका कुशल क्षेम पूछा। गुरुदेव ने हमें बहुत ही गंभीर स्वर में कहा की बहुत बड़ा तूफान आया है, बहुत नुकसान हुआ है परंतु अभी तो यह कुछ भी नहीं है!

अभी बहुत बड़ा संकट महाकाल की नगरी और सिंहस्त महाकुंभ पर मंडरा रहा है। सामान्यतः गुरुदेव जटिल से जटिल परिस्थितियों में भी बहुत ही शांत, सामान्य और प्रसन्नचित्त अवस्था में रहते हैं परंतु आज वह बहुत गंभीर थे और उन की गंभीरता को हम भांप रहे थे, ऐसा लग रहा था कि कोई बहुत बड़ा संकट आने को है। हमने गुरुदेव से कहा कि हम कल ही उज्जैन पहुंच जाते हैं और आपसे इस विषय पर विस्तृत तौर पर चर्चा करते हैं, तो गुरुदेव ने हमें आदेश दिया कि तुम कामाख्या में ही रुको तुम्हारी आवश्यकता वहां पर है। रात्रि में एक बड़े अनुष्ठान की तैयारी कामाख्या महा श्मशान भूमि में करो और हमारा अनुष्ठान उज्जैन चक्रवर्ती महा श्मशान में होगा।

हमने गुरुदेव से प्रार्थना की कि कृपया यह बताएं कि संकट क्या है? और हमें अनुष्ठान क्या करना है? तो गुरुदेव ने बहुत ही गंभीर स्वर में हम से वार्तालाप किया और हमें बताया कि उज्जैन सिंहस्त महाकुंभ पर चांडाल योग बन रहा है और “महाकाल” जिनके लिए संपूर्ण पृथ्वी का विनाश कर देना पल भर का कार्य है अपनी पूर्ण प्रचंडता में है। उज्जैन का ज्योतिर्लिंग मात्र एक ज्योतिर्लिंग ऐसा है जो की दक्षिण मुखी है और शिव के रुद्र रूप, अघोर स्वरुप और यम रूप का प्रतिरूप है। यह ज्योतिर्लिंग पूर्ण रूप से तंत्रोक्त है। बहुत वर्षों से इस ज्योतिर्लिंग का भस्म अभिषेक चिता भस्म द्वारा किया जाता था परंतु आजकल वह पूर्ण रूप से बंद है। अब गाय के गोबर से बने उपलों की राख से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक प्रातः भस्म आरती में किया जाता है।

गुरुदेव ने बताया कि महाकाल की ऊर्जा को संभाल पाना किसी के लिए भी आसान नहीं है और उनकी ऊर्जा को नियंत्रित रखने के लिए ही पूर्व काल में विद्वानों ने महाकाल ज्योतिर्लिंग का अभिषेक चिताभस्म द्वारा नित्य करने का करने का विधान बताया था जो कि अब खंडित हो चुका है और इसके दुष्परिणाम निकलेंगे।

गुरुदेव ने हमें आदेश दिया कि तुम आज रात को कामाख्या महा श्मशान में शक्ति महा चक्र स्थापित कर श्मशान जागरण पूजन और शक्ति कृपा प्राप्ति अनुष्ठान प्रारंभ करो और हम चक्रतीर्थ उज्जैन महा श्मशान में कुछ औघड़ साधुओं के साथ श्मशान जागरण प्रक्रिया शुरू करेंगे।

“महाकाल” का महा श्मशान में चिता भसम से भस्म अभिषेक अनुष्ठान करेंगे। गुरुदेव ने हमें चेतावनी दी कि यह अनुष्ठान बहुत ही खतरनाक अनुष्ठान है, इसमें प्राणों का भी संकट बन सकता है परंतु तुम्हें गुरु शिष्य परंपरा का निर्वाह करना होगा, चाहे संकट कितना भी गंभीर क्यों ना हो क्योंकि यह अनुष्ठान मानवता की रक्षा के लिए है।

गुरुदेव से आशीर्वाद ले हमने अनुष्ठान प्रारंभ किया। जैसे ही हमने अनुष्ठान शुरू किया तो हमें बहुत सारी शक्तियों ने बाधित करने कई कोशिश की। एक क्षण यह था की मेरा जीवन समाप्त होने वाला है। लेकिन उसी क्षण हमें महसूस हुआ की हमारे पूज्य गुरुदेव हमारे समीप है और हमें उन सारी शक्तियों से बचाया। हमें अनुष्ठान करते हुए यह महसूस होता रहा कि पूज्य गुरुदेव हमारे साथ बैठकर हमसे अनुष्ठान करवा रहे हैं और प्रातः सफलतापूर्वक उसे संपन्न करवाया। 

गुरुदेव ने पूरी रात्रि उज्जैन में अनुष्ठान किया और प्रातः अनुष्ठान की कुछ गंभीरता को या यह कहें कि अनुष्ठान की किसी बाधा को दूर करने के लिए अपना हाथ काट एक कटोरे में रक्त को भर उस रक्त से शमशान की शक्तियों का पूजन और यज्ञ अनुष्ठान किया।

अब गुरुदेव ने ऐसा क्यों किया यह रहस्य तो वह ही जाने? परंतु अनुष्ठान पूर्ण रुप से सफल रहा और उनकी कृपा से हमें भी अनुष्ठान में किसी भी तरह की बाधा महसूस नहीं हुई। हमें अनुष्ठान करते हुए यह महसूस होता रहा कि पूज्य गुरुदेव हमारे साथ बैठकर हमसे अनुष्ठान करवा रहे हैं। गुरु लीला अपरंपार है!  हम धन्य है कि हमें ऐसे गुरु की प्राप्ति हुई जिनके लिए जन कल्याण सर्वोपरि है।

अनुष्ठान के उपरांत हम कामाख्या से उज्जैन महाकुंभ में पहुंचे और गुरुदेव से मुलाकात की। गुरुदेव के साथ बैठकर हमने अनुष्ठान के बारे में चर्चा की तो गुरुदेव ने हमें बताया कि अनुष्ठान पूर्ण रूप से सफल रहा है। गुरुदेव ने बताया कि महाकुंभ में तूफान आने और यह संकट खड़ा होने के उपरांत बहुत से ज्योतिष आचार्यों और तंत्र आचार्यों ने यह भविष्यवाणी की थी की यह सब चांडाल योग के कारण हो रहा है और पुनः भी इस तरह का संकट महाकुंभ पर बनेगा, बहुत से लोगों की जान जाएगी। गुरुदेव ने कहा कि हमें भी यह बात स्पष्ट दिखाई दे रही थी की महाकुंभ में अनिष्टकारक योग बन रहा है और इस योग को खंडित करना बहुत आवश्यक है।

गुरुदेव ने बताया कि मात्र शक्ति द्वारा ही महाकाल को नियंत्रित किया जा सकता है। यह स्थिति ऐसी थी कि इसमें शक्ति जागरण बहुत अनिवार्य था अगर हम उज्जैन शमशान में महाकाल को जागृत करते तो उन्हें शक्ति द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता था और क्योंकि कामाख्या शक्ति का केंद्र बिंदु है तो वहां पर तुम्हारे द्वारा अनुष्ठान करना बहुत अनिवार्य था। यह बता गुरुदेव शांत हो गए। उनके चेहरे पर आनंद और प्रसन्नता के भाव थे और एक रहस्यमई मुस्कान थी। 

यहां पर अनुष्ठान के विषय में ज्यादा उल्लेख नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह तंत्र का बहुत ही गुप्त और सर्वोच्च अनुष्ठान था। इसकी प्रक्रिया पूर्णता गोपनीय रखी जाती है। बहुत सारे समाचार-पत्रों, टीवी चैंनलों ने इस विषय पर गुरुदेव से राय मांगनी चाही परंतु उन्होंने इसे पूर्णत: गोपनीय रखा। कुंभ के दौरान उज्जैन में बहुत ही ज्यादा भीड़ होती है और देश-विदेश के पत्रकार इस तरह की खबरों की खोज में हर जगह होते हैं, तो कुछ समाचार पत्रों, टीवी चैनलों द्वारा गुरुदेव के अनुष्ठान के विषय में अलग-अलग आंकलन किए गए परंतु वास्तव में क्या हुआ वह कोई नहीं जानता। उसका कुछ उल्लेख आज हमने इस लेख में किया है, वह भी गुरुदेव की आज्ञा के उपरांत। 

जय महाकाल

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