तंत्र शास्रानुसार ऐसा करने से आपको मिलेगा मनचाहा या खोया प्यार

तंत्र शास्रानुसार ऐसा करने से आपको मिलेगा मनचाहा या खोया प्यार

जैसा की हमने आपको अपने पिछले लेख में बताया था की इंडिया हल्लाबोल के पाठकों की डिमांड पर हमने दुनिया की तन्त्र की राजधानी माने जाने वाली पीठ “कामख्या मंदिर” (गुवाहटी, असम) के भैरव पीठ के उत्तराधिकारी श्री शरभेश्वरा नंद “भैरव” जी महाराज से बात कर उनसे तन्त्र के सही स्वरूप को जानने के लिए निवेदन किया था। जिस पर इंडिया हल्ला बोल के पाठकों के लिए उन्होंने पहली बार मीडिया में अपने लेख देने के लिए अपनी सहमति दी है। उसी क्रम में हम आज उनका ये लेख आपके लिए लेकर आये हैं “तंत्र शास्रानुसार ऐसा करने से आपको मिलेगा मनचाहा या खोया प्यार”

श्री शरभेश्वरा नंद “भैरव” जी महाराज से मिलने के लिए आप 09418388884 पर कॉल करके अपनी मीटिंग फिक्स कर सकते हैं। 

श्री शरभेश्वरा नंद “भैरव” जी महाराज के अनुसार

परमात्मा ने हमें जो यह मनुष्य जीवन दिया है इसमें समय-समय पर हमें तरह-तरह के अनुभव होते हैं। कभी हमारा जीवन बहुत सुखी और समृद्ध होता है तो कभी अचानक निराशा और अंधकार में डूब जाता है। इसके पीछे क्या कारण है? ऐसा क्यों होता है? इसके लिए हमारे ऋषि मुनियों ने इन सभी विषयों पर बहुत गहन शोध किया है। उस शोध के परिणाम स्वरूप ज्योतिष विद्या, अंकशास्त्र, वास्तु शास्त्र और तंत्र विद्या को प्रतिपादित किया गया।

मनुष्य जीवन में तरह-तरह की समस्याओं के पीछे कारण भी अलग-अलग होते हैं। ऋषि-मुनियों ने इन सभी गहन पहलुओं पर हजारों वर्षों तक शोध किया और जन कल्याण के लिए उसके उपाय भी सुझाएं।

तंत्र विद्या का स्थान इन सभी में शीर्ष पर था। बहुत से महापुरुषों, सिद्धों ने तंत्र विद्या के गौरव को बढ़ाने का कार्य किया परंतु आज के परिवेश में तंत्र विद्या को बहुत ही निम्न स्तर पर स्थापित कर दिया गया है। तंत्र विद्या को आडंबर,पाखंड, जादू टोना, वशीकरण आदि से जोड़कर देखा जाता है।  किसी भी तांत्रिक की छवि अगर हमारे मन में आती है तो ऐसे व्यक्ति की छवि बनती है जिसमें यह सभी अवगुण पूर्ण रुप से विद्यमान हो। तंत्र का अर्थ ही यह निकाला जाता है कि अगर कोई किसी पर अभिचार कर्म, वशीकरण आदि करने की क्षमता रखता हो तो वही तंत्र का ज्ञाता माना जाता है।

आज बड़े बड़े समाचार पत्रों में टीवी चैनलों में प्रचार भी ऐसे ही किया जाता है… मनचाहा काम घर बैठे करवाएं, मनचाहे प्रेम की प्राप्ति, स्त्री वशीकरण, शत्रु बाधा से मुक्ति, विदेश यात्रा, गड़ा धन प्राप्त करना आदि-आदि। हम आपको यह कहना चाहते हैं कि यह सिर्फ और सिर्फ तंत्र के नाम पर और आपके विश्वास के नाम पर पाखंड मात्र हैं। ऐसे पाखंडियों से बचना चाहिए। यह तंत्र का वास्तविक स्वरूप नहीं है। हम आपको कुछ ऐसी ही घटना से परिचित करवाना चाहते हैं जिसे जानकर आप यह समझेंगे कि वास्तविकता क्या है?

बहुत से लोग हमें संपर्क कर कहते हैं कि हमें मनचाहे प्रेम की प्राप्ति करवा दीजिए, शत्रुओं को मरवा दीजिए हमारे मनचाहे काम सिद्ध हो जाएं कुछ ऐसा उपाय कीजिए। हम सभी से यही बात कहते हैं कि इस तरह के कार्य हम नहीं करते हैं और ना ही आज तक किसी तंत्र साधक ने किए हैं, जिसने तंत्र के सही मार्ग का अनुसरण किया हो।

हमारे पास कुछ समय पूर्व किसी युवती ने संपर्क किया और कहा कि वह किसी से बहुत प्रेम करती है। वह किसी कारण से उससे दूर हो गया है, तो गुरु जी कुछ ऐसा प्रयोग कीजिए कि वह मेरे प्रेम में पागल हो जाए। दिन-रात बस मेरे बारे में ही सोचता रहे। हमने उस युवती को बहुत डांटा और कहा कि इस तरह के कार्य हम नहीं करते हैं और आपको भी यह सुझाव देते हैं कि आप भी यह ना करें क्योंकि इस का परिणाम हमेशा ही दुखदाई होता है।

कुछ दिनों के उपरांत पुनः उस युवती ने हमें संपर्क किया और बताया गुरु जी मुझे बहुत लोगों ने जिससे मैं प्रेम करती हूं उसकी प्राप्ति करवाने के नाम पर बहुत पैसा लूट लिए है, लेकिन मेरा कोई कार्य नहीं हुआ। मुझे यह बहुत अच्छा लगा कि आपने साफ-साफ मना कर दिया और मुझे यह भी समझाया कि यह उचित नहीं है। कृपया आप मेरी सहायता करें कि मुझे क्या करना चाहिए? जिस से प्रेम करती हूं उसके बिना में अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकती। कृपया मेरी सहायता करें, कुछ तो रास्ता मुझे बताइए। उसके प्रेम और पीड़ा को समझते हुए हमने उसे मिलने का समय दिया।

वह युवती हमसे मिलने आई, वह बहुत ही संपन्न परिवार से संबंध रखती थी और कई वर्षों से उसका प्रेम संबंध किसी युवक के साथ चल रहा था। परंतु बीच में कुछ ऐसी परिस्थितियां हुई कि वह युवक उससे दूर हो गया। उससे बात करनी बंद कर दी। हमने उसे समझाया कि अगर वह तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता और अब उसे तुमसे प्रेम नहीं रहा है तो तुम्हें भी उसकी प्राप्ति की इच्छा नहीं रखनी चाहिए क्योंकि अब उसकी प्राप्ति उसकी इच्छा के विरुद्ध होगी। किसी की इच्छा के विरुद्ध उसकी प्राप्ति को प्रेम नहीं माना जा सकता।

परंतु वह अपनी बात पर अड़ी रही और बार-बार यही निवेदन करती रही कुछ तो रास्ता दीजिए नहीं तो मेरा जीवन समाप्त हो जाएगा। मेरी सहायता कीजिए, मेरी पीड़ा को समझिए।

अंततः उसके प्रेम की सच्चाई को समझते हुए हमने उसकी सहायता करने का मन बनाया। हमने उससे कहा कि ठीक है हम तुम्हारी सहायता करेंगे परंतु जो हम विधान बताएंगे उसे पूर्ण निष्ठा भाव से करना होगा। वह बहुत प्रसन्न हुई और कहा जो आप बताएंगे में उसे अवश्य निष्ठापूर्वक करूंगी बस आप मार्ग बताएं।

“सच्चे प्रेम की मनोकामना -जिस किसी से प्यार करें उसे पाने के लिए अपने अराध्य देव या दूसरे देवी-देवताओं से प्रार्थन करें कि उसमें रत्तीभर भी फर्क नहीं आने पाए।” 

अब क्योंकि प्रेम प्राप्ति और प्रेम संबंधी बाधाओं को दूर करने में किसी देवी देवता में अगर किसी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, तो वह मां भगवती शक्ति रूपिणी, सर्वोच्च शक्तिपीठ की स्वामिनी मां कामाख्या हैं। इन्हीं के उपाय इन विषयों में अचूक हैं। हमने उस युवती को मां कामाख्या का एक विधान बताया और उसे कहा कि कुछ दिनों तक पूर्ण आस्था भाव से निष्ठापूर्वक मां भगवती कामाख्या का यह विधान करो और कुछ अनुभव होते ही हमें पुनः संपर्क करो।

लगभग 1 महीने के उपरांत पुनः उस युवती ने हमें संपर्क किया और बताया कि वह नित्य निष्ठापूर्वक मां कामाख्या की पूजा अर्चना कर रही है। कल रात्रि में उसे स्वपन हुआ कि उसे अपना प्रेमी दिखाई दिया जिसका वह बहुत निरादर कर रही है, उसे छोड़ कर किसी और के साथ उसका विवाह हो रहा है। उसका यह वृतांत सुनकर हमें समस्या का मूल समझ में आ गया और हमने उसे पुनः मिलने के लिए बुलाया।

जब वह हमसे मिलने आई तो हमने उसे गहन ध्यान अवस्था में भेजा और कहा कि वह यह देखें कि पिछले जन्म में उसका उस युवक से क्या सम्बन्ध था। युवती जब ध्यान में गई, जिसकी एक विशेष प्रक्रिया हमारे द्वारा करवाई जाती है तो उसने बताया कि पूर्व जन्म में उसने इस युवक का तिरस्कार किया था। इसके प्रेम का अपमान किया और किसी अन्य के साथ विवाह कर लिया और यह युवक इसी पीड़ा में अपना पूरा जीवन जीता रहा। हमें सब समझ में आ गया था युवती के होश में आने पर हमने उसे समझाया कि हमारी समस्याओं का कारण यह आवश्यक नहीं कि अभी इस जीवन का हो। कई बार इसके कारण हमारे प्रारब्ध में हमारे पूर्व जन्म में भी छिपे होते हैं।  

अब इस जीवन में उसी मनोवृति के साथ इसका उद्देश्य यही था कि यह भी तुम्हें उसी पीड़ा से उसी वियोग से पीड़ित करें। अब क्योंकि तुम्हें मां कमाख्या ने तुम्हारी समस्या के मूल का ज्ञान करवाया है , तो अब तुम मां से अपने इस अपराध के लिए क्षमा याचना करो। उस युवक की चेतना से क्षमा याचना करो और अपनी आगे की साधना पूर्ण रूप से अपने इस पाप कर्म के पश्चाताप के रुप में करो। अवश्य ही भगवती तुम पर कृपा करेगी।

उस युवती की आस्था को अब बल मिल चुका था तो उसने पुनः निष्ठापूर्वक भगवती की साधना की और कुछ दिनों के उपरांत ही वह पुनः एक युवक के साथ हमारे पास आई। वह बहुत ही प्रसन्न थी उसने हमें कहा स्वामी जी आपकी कृपा से मां कामाख्या की कृपा से मुझे सब कुछ प्राप्त हो गया। वह युवक ही उसका प्रेमी था और वह भी बहुत प्रसन्न था।

उस युवक ने हमें बताया कि वह भी उससे बहुत प्रेम करता है, परंतु अचानक उसके मन में उसके प्रति नफरत के भाव उत्पन्न होने शुरू हो गए, उसे ऐसा लगना शुरू हुआ कि उसे इसका त्याग कर देना चाहिए। इसे खूब पीड़ा देनी चाहिए जबकि उसे स्वयं भी यह ज्ञान नहीं था कि वह ऐसा क्यों करना चाहता है। खैर अब दोनों प्रसन्न थे तो हमने दोनों को आशीर्वाद दिया। कुछ समय उपरांत उनका विवाह हुआ। हमने उन्हें यह भी कहा था की विवाह उपरांत वह कामाख्या माता के दर्शन के लिए जाए और जीवनभर मां कामाख्या की साधना करें।

अब हम आप को समझाते हैं कि वास्तव में होता क्या है? कभी-कभी हमारे जीवन में ऐसे लोग आते हैं जो हमें बहुत ही पीड़ा और कष्ट देते हैं। उसका कारण इस जीवन में तो हमें समझ में नहीं आता है तो निश्चित तौर पर पूर्व जन्म में कुछ ऐसे कारण अवश्य रहे होंगे कि हमारी वजह से उन्हें भी पीड़ा और कष्ट उठाना पड़ा हो। अब वह लोग इस जन्म में पुनः हमारे साथ जुड़ते हैं, उन्हें स्वयं यह ज्ञान नहीं रहता है कि हमारी वजह से उन्होंने पूर्व में कितने कष्ट और पीड़ा उठाई है परंतु उसकी चेतना सदैव सचेत रहती है और जाने अनजाने में दूसरे व्यक्ति को वही पीड़ा और कष्ट का अनुभव करवाती है।  इस का एकमात्र उपाय है उस पाप कर्म से मुक्त होना और उसका प्रायश्चित…

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