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कहां से आया नाग, डमरु, त्र‌िशूल, त्र‌िपुंड और नंदी श‌िवजी के पास

त्रिशूल 

भगवान श‌िव सर्वश्रेष्ठ सभी प्रकार के अस्‍त्र-शस्‍त्रों के ज्ञाता हैं लेक‌िन पौराण‌िक कथाओं में इनके दो प्रमुख अस्‍त्रों का ज‌िक्र आता है एक धनुष और दूसरा त्र‌िशूल।

त्र‌िपुरासुर का वध और अर्जुन का मान भंग, यह दो ऐसी घटनाएं हैं जहां श‌िव जी ने अपनी धनुर्व‌‌िद्या का प्रदर्शन क‌िया था। जब‌क‌ि त्र‌िशूल का प्रयोग श‌िव जी ने कई बार क‌‌िया है। त्र‌िशूल से श‌िव जी ने शंखचूर का वध क‌िया था। इसी से गणेश जी का स‌िर काटा था और वाराह अवतार में मोह के जाल में फंसे व‌िष्‍णु जी का मोह भंग कर बैकुण्ठ जाने के ल‌िए व‌िवश क‌िया था।

भगवान श‌िव के धनुष के बारे में तो यह कथा है क‌ि इसका आव‌िष्कार स्वयं श‌िव जी ने क‌िया था। लेक‌िन त्र‌िशूल कैसे इनके पास आया इस व‌िषय में कोई कथा नहीं है। माना जाता है क‌ि सृष्ट‌ि के आरंभ में ब्रह्मनाद से जब श‌िव प्रकट हुए तो साथ ही रज, तम, सत यह तीनों गुण भी प्रकट हुए। यही तीनों गुण श‌िव जी के तीन शूल यानी त्र‌िशूल बने। इनके बीच सांमजस्य बनाए बगैर सृष्ट‌ि का संचालन कठ‌िन था। इसल‌िए श‌िव ने त्र‌िशूल रूप में इन तीनों गुणों को अपने हाथों में धारण क‌िया। 

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