जानिए श्री कृष्ण ने ब्रह्माजी का कैसे तोड़ा घमंड Brahma Moh Bhang Leela by Krishna

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जानिए श्री कृष्ण ने ब्रह्माजी का कैसे तोड़ा घमंड Brahma Moh Bhang Leela by Krishna

भगवान श्रीकृष्ण ग्वालबालों को बछड़ों सहित यमुना जी के पास ले आये। दिन अधिक चढ़ जाने के कारण सभी को भूख लगी थी। बछड़ों ने यमुना जी का पानी पिया। ग्वालबाल भगवान के साथ भोजन करने लगे। भगवान सब के बीच बैठकर अपनी विनोद भरी बातों से अपने साथी ग्वालबालों को हँसाते जा रहे थे और उन्हीं के साथ उनका झूठा खाना खा रहे थे। यह देख कर ब्रह्मा जी को लगा की ये भगवान नहीं हो सकते, अगर ये भगवान होते तो ऐसे सभी का झूठा नहीं खाते। इस प्रकार भोजन करते-करते ग्वालबाल भगवान की इस लीला में तन्मय हो गए। उसी समय उनके बछड़े हरी-हरी घास के लालच में बड़ी दूर निकल गए।

ग्वालबाल बछड़ों को वहां न पाकर घबरा गए। भगवान ने कहा घबराओ मत। तुम सब भोजन करो मैं बछड़ों को लेकर आ जाता हूँ। ब्रह्मा जी प्रभु के द्वारा अघासुर के मोक्ष पाने को देखकर आश्चर्य-चकित थे। उन्होंने सोचा भगवान श्रीकृष्ण की कोई और लीला भी देखनी चाहिए। ऐसा सोच कर ब्रह्मा जी पहले तो बछड़ों को ब्रह्म-लोक में ले आये, फिर जब भगवान बछड़ों को ढूँढने चले गए, तब ब्रह्मा जी ग्वालबालों को भी ब्रह्म-लोक ले आये।

भगवान श्रीकृष्ण बछड़े न मिलने पर यमुना जी के तट पर वापिस आ गए, परन्तु वहां ग्वालबालों को भी ना पाकर वह सोचने लगे कि भोजन करने के बाद सभी कहीं खेलने न चले गए हों, ऐसा सोचकर भगवान ने उनको चारों ओर ढूँढा परन्तु ग्वालबालों के भी न मिलने पर उन्होंने आखें बन्द करके ध्यान लगाया और वह समझ गए कि ये सब ब्रह्मा जी की करतूत है।

अब भगवान श्रीकृष्ण ने जितने ग्वालबाल और बछड़े थे,उतने ही अपने रूप बछड़ों और ग्वालबालों के रूप में बना लिए। सर्वात्मा भगवान स्वयं ही बछड़े बन गए और स्वयं ही ग्वालबाल। अपने आत्म-स्वरूप बछड़ों को अपने आत्म-स्वरूप ग्वालबालों के द्वारा घेर कर अपने ही साथ अनेक प्रकार के खेल खेलते हुए ब्रज में प्रवेश किया। जिस ग्वालबाल के जो बछड़े थे, उन्हें उसी ग्वालबाल के रूप में उनके भिन्न-भिन्न घरों में चले गए। इसी तरह प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण उन्ही बछड़ों और ग्वालबालों के साथ वन में जाते और संध्या को अपने-अपने घरों में लौट जाते। इस प्रकार करते-करते एक वर्ष बीत गया।

तब तक ब्रह्मा जी ब्रह्म-लोक से ब्रज में लौट आये। उन्होंने देखा कि भगवान पहले की भान्ति ग्वालबालों के साथ क्रीडा कर रहे हैं। वह सोचने लगे कि गोकुल में जितने भी ग्वालबाल और बछड़े थे वो तो मेरी मायामयी शय्या पर सो रहें हैं- उनको तो मैंने अपनी माया से अचेत कर दिया था। वे तो अभी तक सचेत नहीं हुए हैं। फिर मेरी माया से मोहित ग्वालबाल और बछड़ों के अतिरिक्त ये उतने ही दूसरे बालक और बछड़े कहाँ से आ गये, जो एक साल से भगवान के साथ खेल रहे हैं?

ब्रह्मा जी ने आँखे बंद की और देखा वे सब ग्वालबाल और बछड़े और कोई नहीं, स्वयं श्रीकृष्ण ही हैं।  यह अत्यन्त आश्चर्यमय दृश्य देखकर ब्रह्मा जी चकित रह गए। उनकी ग्यारहों इन्द्रियाँ क्षुब्ध एवं स्तब्ध रह गईं। ब्रह्मा जी उसी क्षण श्रीकृष्ण के चरणों में गिर पड़े और भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करने लगे।

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