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परमेश्वर का वचन – बाइबल – What Does the Bible Say About Word Of God

से बोलते थे।” 2 पतरस 1:21 ।। दाऊद कहता है, “यहोवा का आत्मा मुझ में हो कर बोला , और उसी का वचन मेरे मुंह में आया।” 2 शमुएल 23:2 ।।

2. पवित्र आत्मा बाइबल का लेखक है। 2 पतरस 1:21

मनुष्य एक साधन या ज़रिया है जिसके द्वारा पवित्र आत्मा ने बाइबल लिखवायी। इसका परिणाम : अचूक त्रुटि रहित तथा पूर्णतः विश्वासयोग्य परमेश्वर के वचन। भजन संहिता 119:89; मत्ती 24:35 ।।

 3. बाइबल एक कठिन पुस्तक है

1 कुरि 2:14-16 “परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता।”

बाइबल एक कठिन पुस्तक है क्योंकि यह अनंत समय से समय की सीमा में और असीमित सर्वशक्तिमान परमेश्वर से सीमित मनुष्य के पास आई है। यदि बाइबल सहज मनुष्य की समझ आ जाती तो यह एक सहज पुस्तक होती।  परंतु इसलिए कि बाइबल परमेश्वर से है, यह आत्मिक है। इससे पहले कि आप इसकी शिक्षाओं को ग्रहण करें, अवश्य है कि आप आत्मा के द्वारा नया जन्म लें। देखें, यूहन्ना 3:6। जब बाइबल लें तो पहले प्रार्थना करें कि पवित्र आत्मा आप का शिक्षक हो और आपका मार्ग दर्शन करे ताकि आप उसके पवित्र वचनों को बेहतर रीति से समझ सकें वरना यह आपके लिए एक कठिन और बन्द किताब बन जायेगी। यूहन्ना 16:12-15।।

4. बाइबल एकत्व की पुस्तक है

2 पतरस 1:21 “क्योंकि कोई भी भविष्यवाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जा कर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।।”

बाइबल की एकता या एकरूपता आश्चर्यजनक है। यह 66 पुस्तकों का संकलन है, जो 35 से भी अधिक अलग- अलग लेखकों के द्वारा, तकरीबन 1600 वर्षों के लंबे समय में लिखी गई। इसमें समाज के विभिन्न वर्गों से लेखकों का प्रतिनिधित्व है। इस के लेखकों में राजा, मछुवारे, राजकीय अधिकारी, किसान, शिक्षक, तथा वैद्य शामिल हैं। इनके विषयों में धर्म, इतिहास, व्यवस्था, विज्ञान, काव्य, कथा, जीवनी तथा भविष्यवाणियां सम्मिलित है। फिर भी ऐसे

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