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Jesus Christ Story in Hindi – यीशु मसीह कौन है?

हे परमेश्वर, तेरा सिंहासन युगानुयुग रहेगा, तेरे राज्य का राजदण्ड है ।”

इसलिए, जैसा कि सी एस लुईस ने सिद्ध किया, कि यीशु को एक अच्छे शिक्षक के रूप में मानना कोई विकल्प नहीं है । यीशु ने स्पष्ट रूप से तथा अकाट्य रूप से परमेश्वर होने का दावा किया । अगर वो परमेश्वर नहीं है, तो फिर वो झूठा है, तथा इसलिए एक पैगंबर; अच्छा शिक्षक, या धार्मिक पुरुष नहीं है । निरंतर यीशु के शब्दों का व्याख्यान करने के प्रयासों में, आधुनिक विद्वान यह दावा करते हैं कि “वास्तविक ऐतिहासिक यीशु” ने वो कई बातें नहीं कहीं जो कि बाइबल उसे प्रदान करती है । परमेश्वर के वचन के साथ हम विवाद करने वाले कोन होते हैं कि यीशु ने यह कहा या नहीं कहा? एक विद्वान में, जो कि यीशु के दो हज़ार साल से अलग है, इतना अर्न्तज्ञान कैसे है सकता है कि यीशु ने यह कहा या नहीं कहा जितना कि उनमें जो उसके साथ रहे, उसकी सेवा करी तथा स्वयं यीशु से शिक्षा पाई (यूहन्ना १४:२६)?

यीशु की वास्तविक पहचान के ऊपर प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है? इस बात से क्यों फर्क पड़ता है कि यीशु परमेश्वर है या नहीं? सबसे महत्वपूर्ण कारण कि यीशु को परमेश्वर होना था वो यह है कि अगर यीशु परमेश्वर नहीं है, तो उसकी मृत्यु पूरे संसार के पापों के जुर्माने की कीमत अदा करने के लिये पर्याप्त नहीं हो सकती थी (१यूहन्ना २:२) । केवल परमेश्वर ही ऐसा असीम जुर्माना भर सकता है (रोमियो ५:८; २कुरिन्थियों ५:२१) । यीशु को परमेश्वर होना था जिससे वो हमारा उधार चुका सकता । यीशु को मनुष्य होना था जिससे वो मर सके । केवल यीशु मसीह में विश्वास करके ही उद्धार पाया जा सकता है ! यीशु की प्रभुता ही है कि वो ही उद्धार का एकमात्र मार्ग है । यीशु की प्रभुता ही है कि उसने यह दावा नहीं किया (द्घोषणा की), “मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ । बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना १४:६)

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