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सम्पादकीय

सख्त कानून किस काम का?

मौजूदा कानून अगर न्याय नहीं दिला सकता तो और सख्त कानून किस काम का​?समता और सामाजिक न्याय के बिना क्या कानून का राज संभव है ? और लिंगभेद का क्या मौजूदा कानून अगर न्याय नहीं दिला सकता तो और सख्त कानून किस काम का​? समता और सामाजिक न्याय के बिना क्या कानून का राज संभव है? और लिंगभेद का क्या? …

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बलात्कारी संस्कृति के लिए दोषी कौन?

मित्रों,जब मैं बच्चा था तब अक्सर देखा करता था कि बकरी का नर बच्चा अक्सर अपनी सहोदर बहनों और जन्मदात्री माँ के साथ सेक्स संबंध बनाने को उतावला हो उठता था। तब मैं सोंचता था कि क्या भविष्य में हम भारतीयों की भी यही स्थिति होनेवाली है? भारतीयों की इसलिए क्योंकि तब तक पश्चिम के समाज के बारे में मैं सुन-पढ़कर …

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24 घंटे में 66 बलात्कार

भूख के कई रूप हैं…एक है पेट की भूख…जो इंसान को कुछ भी करने को मजबूर कर देती है…कुछ लोग इस भूख को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं लेकिन बार बार लौट पर आने वाली भूख कई बार इंसान पर भारी पड़ती है और आखिर में इंसान को ही खा जाती है…भारत में हर रोज भूख से होने वाली …

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अफ़ज़ल और संसद पर हमले की अजीबो-ग़रीब दास्तान

कसाब की फांसी के बाद, अफ़ज़ल को भी जल्दी ही फांसी की मांग उठाए जाने की पृष्ठभूमि में यह आलेख पढ़ने को मिला. 13 दिसम्बर, संसद पर हमले की तारीख़ की आमद के मद्देनज़र अरुंधति रॉय के इस आलेख को गंभीरता से पढ़ा जाना और आम किया जाना और भी मौज़ूं हो उठता है. हिंदी में यह अभी नेट पर …

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कसाब से आतंकवाद का अंत नही

मुंबई आतंकी घटना में जीवित पकडे गए आमिर अजमल कसाब को आज संवैधानिक व्यवस्था के तहत फांसी दी गयी। इस फांसी के बाद अगर लोगों की यह सोच हो कि आतंकवाद से छुटकारा मिल जायेगा तो यह संभव नहीं है। मुंबई आतंकी घटना की मुख्य सूत्रधार आई एस आई पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का नाम मुख्य रूप से आया था। आई एस …

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कैग को पंचिंग बैग न समझें केंद्रीय मंत्री

मित्रों,इन दिनों भ्रष्टाचार के महान क्षेत्र में सारे पूर्व कीर्तिमानों को भंग कर चुकी कांग्रेस पार्टी माईक टाईसन हुई जा रही है और उसके लिए मुक्केबाजी के अभ्यास के लिए आसान पंचिंग बैग बन गई है वह संस्था जिसको संविधान ने खजाने का पहरेदार बनाया है। मौका मिला नहीं कि चला दिया एक घूसा। यह बात अलग है कि उनके …

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अब भारत सरकार की जरुरत क्या है

संसद के भरोसे उदारीकरण कब रुका है जो रुक जायेगा सार्वभौम राष्ट्र में अलगअलग राज्य अमेरिका और दूसरे देशों का उपनिवेश ​बनता जा रहा है। केंद्र सरकार ने खुदरा कारोबार में विदेशी पूंजी के सवाल पर राज्यों को निर्मय की आजादी देकर देश के संघीय ढांचा और​ ​ समता के सिद्धांत को पहले ही तिलांजलि दी है। राज्यों के क्षत्रपों …

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दो पड़ोसी और अल्पसंख्यक

भारत और पाकिस्तान ये दोनों पड़ोसी सन 1947 के अगस्त महीने के मध्य में स्वतंत्र हुए थे। आज, स्वतंत्रता के 65 साल बाद, इन दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है? बेहतर प्रजातंत्र की स्थापना के लिए इस प्रश्न का उत्तर जानना महत्वपूर्ण होगा।   विगत 11 अगस्त को मुंबई के आज़ाद मैदान में 50,000 से अधिक लोग इकठ्ठा …

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कोयला महाकाव्य के नायक भी हर महाकाव्य की तरह मर्यादा पुरुषोत्तम!

कोयला माफिया की बात करें तो जेहन में फौरन धनबाद और कोरबा के नाम कौंधते हैं। अनुराग कश्यप की फिल्म ट्विनवासेपुर गैंग्स ने त कोयला माफिया का दायरा धनबाद के एक मोहल्ले और दो परिवारों के खूनी रंजिश में सीमाबद्ध करदिया। पर कोयला आवंटन मामले में कैग की रिपोर्ट के बाद सरकार कितनी मुश्किल में फंसी यह तो कहना मुश्किल …

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बाबा रामदेव अगर त्याग भाव रख कर मुनाफा त्याग दें…

दोस्तों आपको एक राज़ की बात बताते है ..देशभक्त बाबा रामदेव जिन्हें देश की जनता की चिंता है जो कोंग्रेस को भ्रष्ट कहकर हटाने का नारा दे चुके है अगर वोह खुद चाहे तो देश की तस्वीर तो नहीं लेकिन करीब एक करोड़ भारतियों को फायदा पहुंचा सकते हैं लेकिन इसके लियें उन्हें खुद त्याग करना होगा अपने मुनाफे अपने …

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