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ब्लॉग

क्या कहा ?….. " किसान दिवस "……..?

मैंने तो आज तक किसानों के बारे में सिर्फ बचपन में किताबों में पढ़ा था कि , भारत एक कृषि प्रधान देश है और भारत के गावों में देश की शान किसान निवास करते हैं ! हमेशा यही सुनते आये कि , किसान नहीं तो भारत नहीं ! किसान अगर नहीं होगा तो इस देश में कुछ नहीं होगा ! …

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क्या कहा ?….. ” किसान दिवस “……..?

मैंने तो आज तक किसानों के बारे में सिर्फ बचपन में किताबों में पढ़ा था कि , भारत एक कृषि प्रधान देश है और भारत के गावों में देश की शान किसान निवास करते हैं ! हमेशा यही सुनते आये कि , किसान नहीं तो भारत नहीं ! किसान अगर नहीं होगा तो इस देश में कुछ नहीं होगा ! …

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हम नहीं चाहते कि, ये लड़ाई कभी बंद हो

वैसे देखा जाय तो इस देश को हम ही चला रहे हैं और आने वाले हजार सालों तक हम ही इस देश को चलाएंगे ! देखा जाय तो , देश तो अपने आप ही चल रहा है , हमने तो इस देश की लुटिया पहले भी कई बार डुबोई है और आज भी पूरी कोशिश में हम सब लगे हुए …

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बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मायाजाल

भारत में लोकतन्त्र की पूरी तरह से हत्या हो चुकी है सभी स्तंभ ढह चुके है लेकिन वे ऐसा ढोंग कर रहे है जैसे कुछ नहीं हुआ इस लोकतन्त्र के शरीर मे कंपनी तंत्र घुस गया है और ये कंपनी-तंत्र जवाहरलाल के समय से शुरू हुआ है काफी दबाव से ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत से खदेड़ा लेकिन 126 विदेशी कंपनीया …

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मनमोहन तुम कब जाओगे?

मित्रों,अनिद्रा की बीमारी बहुत पुरानी है.कम-से-कम पाँच सौ साल पुरानी तो है ही.कबीर को भी थी,पूरी दुनिया की चिंता जो बेचारे सिर पे उठाए फिरते थे.कबीर रो रोकर कहते फिरते थे-सुखिया सब संसार है खावै अरु सोवै;दुखिया दास कबीर है जागै अरु रोवै.रोते-रोते और जागते-जागते उनकी ज़िन्दगी में एक दिन ऐसा भी आया जब इसका बुरा असर उनकी सेहत पर …

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टी.वी के कोठे पर पत्रकारों का मुजरा

कभी कभी गली के नुक्कड़ और चाय के दुकान पर भी बड़े बड़े मशवरे मिल जाया करते है। वैसे तो पहले चाय और पान की दुकान से ही बड़ी बड़ी सियासत तय होती थी । तब वाकई राजनीति हुआ करती थी, लेकिन दौर बदलने के साथ ही काफी कुछ बदल गया है । फिर भी ज्ञान तो हर जगह बंटता …

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नरेगा या मनरेगा से देश ने क्या खोया ?

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जब से शुरू हुयी है तब से जनता के कर के रूप में दिए गए धन की खुली लूट हुयी है .कांग्रेस सरकार का यह कानून देश के पैसे की भयंकर बर्बादी कर रहा है फिर भी सरकार इस तिलिस्म को चालू रख रही है.क्यों ? इस देश ने मनरेगा से क्या खोया है ? १. …

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क्या आप दबंग हैं ? क्या आप दबंग बनना चाहते हैं ?

जब हम दबंग नाम सुनते हैं तो हमारे दिमाग में किसी हट्टे-कट्टे , चौड़ी छाती वाले रौबदार इन्सान का चेहरा याद आता है ! दबंग नाम सुनते ही हमें किसी रसूखदार या किसी उच्च जाति या किसी गुंडे – मवाली , तेज- तर्रार व्यक्ति का ध्यान आता है ! क्योंकि आज तक हमने ऐसे ही दबंगों के बारे में सुना …

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अमिताभ बच्‍चन पिछले जन्‍म में भी नायक थे….!

महानायक। शताब्‍दी का नायक। सुपर हिरो। एंग्री यंग मैन। शहंशाह। बिग बी। ना जाने कितने नामों से जाना जाता है अमिताभ बच्‍चन को। न भूतो न भविष्‍यति। ऐसी शख्सियत हैं अमिताभ । 11 अक्‍टूबर 1942 को उत्‍तरप्रदेश के इलाहाबाद में जन्‍मे अमिताभ हरिवंश श्रीवास्‍तव के बारे में क्‍या कोई उस वक्‍त जानता था कि आगे चलकर यह हिंदी सिनेमा के …

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पुलिस वाला लुटेरा अथवा वर्दी वाला गुंडा

मित्रों,इन दिनों भारतीय पुलिस की अनैतिकता के अद्भूत कारनामे रह-रहकर लगातार अलग-अलग प्रदेशों से सामने आ रहे हैं.कल-परसों की रात दिल्ली पुलिस का एक जवान लूटपाट और क़त्ल करता हुआ पकड़ा गया है.महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से अनवरत किसानों और आम जनता पर पुलिसिया फायरिंग और जुल्म की ख़बरें आती रहती हैं.बिहार पुलिस का तो कहना ही क्या?इनके बारे में …

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